कभी अँधेरे तो कभी उजाले से लड़ना है
कभी अपने तो कभी पराये से लड़ना है
हरदम तो एक सा नहीं रहता है कोई भी
कभी तन कभी मन तो धन भी गलना है
बस अश्क़ भरी आँखे ही देखीं हैं हमने
आँखों में ख़ुशी का उजास भी भरना है
वैसे तो उसे हमसे मतलब नहीं है कोई
पर दास मुहब्बत का दरिया तो उतरना है
गिर गया जमीं पर आकाश का सितारा
जिसको समझते थे जुगनू का बिखरना है! !


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







