घोड़ो की लगाम खींचकर तू ख़ुद पर इलहाम ना कर
किसी और की मजबूरी क़ो ख़ुद अपना इनाम न कर
ये जो नज़र आ रही हैं तुमको महफिल में रौशनी यूँ
जुगनूओ के हौसलो की दाद दे,अपना गुलाम ना कर
जो इज़्ज़त के काबिल नहीं उसकी क्या हुजूरी करना
उनको आईना दिखा यूँ झुक-झुक कर सलाम ना कर
तेरा लहज़ा बदल रहा तेरा प्यार ढल रहा,क्या कोई हैं
किसी और के ख़ातिर यार मेरा किस्सा तमाम ना कर
ना कोई दुआ-सलाम, ना इश्क़ में ख़ुद क़ो बर्बाद कर
जो तेरा नहीं तू उसके ख़ातिर ख़ुद क़ो क़याम ना कर
कृष्णा ने छोड़ा तुझे, तूने इश्क़ क़ो बेईमान कर दिया
चल जा यार आज के बाद कोई शाम मेरे नाम ना कर...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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