शीर्षक
"जीवन में अनंत लक्ष्य ठानिये"
जीवन में अनंत लक्ष्य ठानिये।
मनुष्य जीवन को सम्मान दृष्टि मानिये।।
जो मनुष्य जीवन लियो हो,
इसका मान जानिये।
बड़े-बड़े देवी देवता इसको पाने के लिए तरसते हैं,
ये मेरे मनुष्य भाइयों सत्य जानिए।।
जीवन में अनंत लक्ष्य................।।
ऐ मेरे मनुष्य भाइयों,
जीवन में सर्वप्रथम यह लक्ष्य ठानिये ।
कि मैं अपने मात-पिता की सेवा करूँगा,
ये मेरी आत्म वाणी सत्य जानिये।।
जीवन में अनंत लक्ष्य...................।।
दूसरा लक्ष्य शिक्षा को ही,
सर्व धनवान मानिये।
जिसने तुम्हें शिक्षा दिया,
उनका सम्मान करिये और उनका एहसान मानिये।।
जीवन में अनंत लक्ष्य.................।।
अगर हौसले बुलंद हो तो,
मुट्ठी में हासिल हर मुकाम मानिये।
मनुष्य के जीवन में परेशानियां आना,
यह तो आम जानिये।।
जीवन में अनंत लक्ष्य...................।।
आज कहता हूँ कल करके दिखाऊंगा,
ऐसी लगन तुम्हारे में होनी चाहिये यही सत्य जानिये।
पर कहते तो सब कोई हैं पर बढ़ने से पहले ही कुछ मुड़ जाते हैं, इसे झूठ साबित करते हुए मनुष्य जीवन का मान जानिये।।
जीवन में अनंत लक्ष्य ठानिये।
मनुष्य जीवन को सम्मान दृष्टि मानिये।।
-


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







