मैं, हम के चक्कर में,
सुनने और सुनाने के चक्कर में,
हम किसी की ना सुने,
और,
कोई हमारी ना सुने,
फिर भी,
सुनते सुनाते आ गए,
भूलते बुलाते ही आ गए,
जिंदगी खींच के जो लाई है,
गिरते, उठते, बढ़ते आ गए,
पढ़ते-पढ़ते कोने से उठकर आ गए,
जिंदगी लाइव थी तो आ गए,
चेहरे छुपते छुपाते पर,
किनारे से दिखाते आ गए,
मन से लड़ते-लड़ते खींचातान में आ गए,
बेवफ़ाई से ही वफ़ा में आ गए,
रूठते को मनाते मनाते आ गए,
जिंदगी लाइव थी,
जी चुराकर जिंदगी जीने आ गए,
जिंदगी लाइव थी,
अपनी क़सम निभाने आ गए,
ना ना ना में हाँ करते ही आ गए,
जिंदगी लाइव थी,
जिंदगी बनकर आ गए,
खोकर पाकर अनुभव नया पा गए,
जिंदगी लाइव थी,
थोड़े बरस जीने आ गए।।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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