जीना है जरूरी
अगर आए हैं इस दुनियां में जीना है जरूरी
अगर रहना है दुनियां में तो हंसना है जरूरी
कुदरत ने सजाई है इन बहारों से ये दुनियां
जीवन, को इन बहारों से, सजाना है जरूरी
क्यूं, घुट-घुट के मरें हम, जमाने के डर से
क्या इस जमाने के सितम सहना है जरूरी
इस अनोखे जगत के, हम हैं आजाद परिन्दे
इस के आसमां में खुल कर उड़ना है जरूरी
ये जमाने की रस्में और जात धर्म के बंधन
कौन, कहता है संग इन के, रहना है जरूरी
समाज को ये उड़ान कब रास आई है यादव
समाज की इन दीवारों को, गिराना है जरूरी
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







