उषा ने खोला स्वर्णिम द्वार,
जाग उठा संसार अपार।
किरणों ने जब घूँघट खोला,
फूलों ने मधुरस में बोला।
पवन सुनाए प्रेमिल गान,
गूँज उठे वन, पर्वत, धाम।
नदियाँ गाएँ जीवन-गीत,
धरती पहने हरित दुकूल।
नील गगन की नीली छाँव,
मन में जागे मधुर लगाव।
काँटों में भी फूल खिलें,
आँसू में मुस्कान मिलें।
तम कितना भी घना हो जाए,
दीप राह अपनी दिखलाए।
बादल घिरकर शोर मचाएँ,
सूरज फिर भी राह बनाए।
श्रम से सींचो सपनों के खेत,
कर्म रचेंगे भाग्य के लेख।
सत्य बने जीवन का मान,
प्रेम बने जग की पहचान।
दीन-दुखी के आँसू पोंछो,
सूखे अधरों पर हँसी बोओ।
मन में करुणा, वचन में प्यार,
सेवा से महके संसार।
लोभ-मोह के बंधन तोड़ो,
घृणा-द्वेष से नाता छोड़ो।
मिल-जुलकर नव दीप जलाएँ,
मानवता का मान बढ़ाएँ।
जीवन क्षण का मधुर तराना,
कर्मों से इसको महकाना।
जग में आए हो तुम आज,
प्रेम बाँटकर करना राज।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







