जबसे इश्क़ को दुआ बना लिया,
तबसे यार जीना मुझको आ गया !!
जबसे इश्क़ को दवा बना लिया,
तबसे यार चलना मुझको आ गया !!
कौन कहता है कि इश्क़ है बुरा,
सही-ग़लत है क्या समझ में आ गया !!
शज़र सुहाने अच्छे लगते हैं वहाँ,
जिनके घर में नगीना आ गया !!
रातें भी हसीन लगने हैं लगी,
जवाब ख़त में जबसे हाँ में आ गया !!
असर-वसर रहा नहीं शराब में,
लबों को मुस्कुराना जबसे आ गया !!
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







