जब से तू गया है
अंधेरा डराता है,
तेरी याद दिलाता है
आँखों में आंसू ले आता है।
बनकर रात सा दिन भी,
ख़ामोशी से नागिन सा डॅंसता है।
जब से तू गया है ...
खुद के होने का
एहसास भी ना रहा,
क्या हूॅं मैं
मेरा कोई वजूद ना रहा।
जब से तू गया है...
मुश्किल से दिन कटता है,
बरसों सा लगता है।
शाम लगती है सदियों सी,
और रात का पल - पल
युगों सा लगता है।
जब से तू गया है...
जब से तू गया है
सब चला गया है,
तेरे आने से पहले था जैसा
सब वैसा ही फिर हो गया है।
मैं थक गई फिर से,
फिर से नासाज़ हुई हूॅं।
जब से तू गया है...
तन्हा हुई फिर से,
फिर से सूखे पत्तों सी बिखरी हूॅं।
जब से तू गया है...
कोई मंज़िल रही नहीं,
कोई चाहत भी बची नहीं।
अब जो भी है मेरे लिए,
सब कुछ तेरे ही ख़्वाब है।
जब से तू गया है...
जब से तू गया है...
🖋️रीना कुमारी प्रजापत 🖋️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







