छू कर मन की भावनाओं को
कुछ एहसास पन्नों पर उतर आते हैं
लब्ज़ भले खामोश हो दिल के गहरे
जज़्बात कोरे कागज पर बिखर जाते हैं
भावनाएं भी मुस्कुरा उठती हैं
जब शब्द अंतर्मन को छू लेते हैं
मन की कली खिल जाती है
जब शब्द मन के धरातल पर
जुगनू की तरह चमकते हैं
शब्दों के गहरे सागर से
कुछ अनमोल एहसासों के मोती
चुनकर जब सुंदर मालाओं में
पिरोए जाते हैं
हर शब्द अंतरात्मा को छूकर
एहसास की सीढ़ी चढ़कर
मन के भीतर उतर आते हैं
मन की नगरी में खुशबू बिखेरते
शब्द खुद फूलों की तरह खिल जाते हैं
महक उठता है मन,खिल जाता है जीवन
जब खिलता है मन में शब्दों का सुमन
दिल हर्षित हो जाता है
मन प्रफुल्लित हो जाता है
मन के सारे तमस मिट जाते हैं
जब शब्द स्वयं रोशनी बन जगमगाता है
हृदय को छूती मन को भिगोती
स्याही जब पन्नों में घुल जाती है
स्याही की मनमोहक खुशबू
हृदयतल को महकाती है
मन हर्ष उल्लास से भर जाता है
जब भावनाओं का भावनाओं से
दीदार हो जाता है
मन मंदिर बन जाता है जब
स्वयं शब्द ईश्वर बन मुस्कुराता है
शब्दों की ताकत से
दुनिया रोशन हो जाती है
शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते
ये अनमोल रत्न और
धरोहर बन जाते हैं।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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