गर पढ़ लिया तुमने मेरी ख़ामोश निगाहों को मतलब अनुरक्ति है
बिन कहे सुन ली सारी अभिलाषाएं इससे बड़ी और क्या सूक्ति है
सच है सच्चे प्यार का आधार जिस्म कभी हो हीं नहीं सकता
मौन स्वरों में बातें कर यदि मिलती है संतुष्टि तो यह भी मुक्ति है
अपनों का सर पे हाथ हो तो हर मुश्किल आसांँ हो जाती है
असंभव संभव व पत्थर पिघल जाता है प्यार में इतनी शक्ति है
ग़लत देख कर भी चुप रहना क्योंकि उससे ख़ून का रिश्ता है
औचित्य की दृष्टिकोण से कदापि उचित नहीं यह तो अंधभक्ति है
सच्चे दिल से मैंने वफ़ा निभाई हरदम बेवफ़ाओं के साथ
मगर मुझे हीं तगमा मिला बेवफ़ाई का अब मुझे उनसे विरक्ति है
जिसने जो कहा मैंने सुना सब चुपचाप क्योंकि प्रतिउत्तर से बेहतर
मुझे लगा मौन हीं तिरस्कार की सबसे उत्तम अभिव्यक्ति है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







