दरिया का शौक है समंदर,
इतना दीदार करता है,
कि समंदर ही हो जाता है,
समंदर ऐसे कहीं शौक ए दीदार आकर मिले हैं,
जो फिर दीदार के लायक ना हुए,
कागजी बयान है सिर्फ,
कि तुम्हारे होने से हम कुछ हुए,
हकीकत तुम्हारे होने से फिर ना हुए।
हमें इश्क़ जितना करना आता है,
उससे ज्यादा तुम्हारा इश्क़ होने का काम है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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