हम सोचते हैं तुमको मनायेंगे किस तरह
देके तुम्हें आवाज़ बुलायेंगे किस तरह
तुमने तो किया बंद है कानों को ही अपने तो
हम अब तुझे आवाज़ लगायेंगे किस तरह
कहते हैं कि रोने न कभी देंगे वो अब हमको
फिर दर्द यहां दिल का सुनायेंगे किस तरह
तुम रोज़ जो आते ही रहे ख़्वाब में 'गर मेरे
तब फिर तुझे हम जान भुलायेंगे किस तरह
जब ख़ुद ही नज़र हमसे चुराने तु लगेगा तो
फिर हम ये नज़र तुझसे मिलायेंगे किस तरह
जो तोड़ चुके ख्वाबों को मेरे वो यहां अक्सर
फिर हमको कोई ख़्वाब दिखायेंगे किस तरह
अब जिनको भरोसा कोई खुद पे नहीं है रहता
वो साथ हमारा भी निभायेंगे किस तरह
हमको नहीं आता है छुपाना ग़मों तो फिर अब
हम आपसे ये अश्क छुपायेंगे किस तरह
तुमसे न कोई ख़त न है अब आस ही मिलने की
फिर हाल ये हम तुमको सुनायेंगे किस तरह
'अनमोल' है कर ज़ब्त लिये हमने तो अपने ग़म
देखें तो वो इस दिल को दुखायेंगे किस तरह।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







