बिंदु-बिंदु में वास तुम्हारा,
कण-कण में विस्तार तुम्हारा।
श्वासों का प्रत्येक स्पंदन,
गाता नित्य ही नाम तुम्हारा।
सूक्ष्म तंतु की मौन लय में,
गूँजे मधुर विहार तुम्हारा।
अणु-अणु की अंतर-ज्योति में,
दिखता दिव्य प्रकाश तुम्हारा।
जल की निर्मल हर लहरों में,
झलके श्याम विहास तुम्हारा।
पवन सुनाए प्रेम-सरगम,
वन गाए उल्लास तुम्हारा।
धरती का प्रत्येक कण बोले,
"कृष्ण" ही विश्वास हमारा।
नील गगन की असीम चादर,
ओढ़े अनुपम रंग तुम्हारा।
सूर्य-किरण का स्वर्ण प्रभामंडल,
लगता मधुर प्रसाद तुम्हारा।
चंद्र-किरण की शीतलता भी,
मानो कोमल स्पर्श तुम्हारा।
तारों की अनुपम माला में,
दमके नित्य श्रृंगार तुम्हारा।
ग्रह-नक्षत्रों की हर गति में,
छिपा हुआ व्यवहार तुम्हारा।
कालचक्र की गति अविरल,
माने दिव्य विधान तुम्हारा।
सृष्टि, स्थिति और संहारों में,
गूँजे अमर स्वरूप तुम्हारा।
माया भी तेरी, लीला तेरी,
जीवन भी उपहार तुम्हारा।
राधा का निष्कलुष समर्पण,
प्रेम बने विस्तार तुम्हारा।
वंशी की अनुपम तान सुनाकर,
जीव जगाओ पार तुम्हारा।
भक्ति बने जब शुद्ध चेतना,
मिट जाए अंधकार सारा।
सूक्ष्म तत्त्व से महाकाश तक,
एक तुम्हारा ही उजियारा।
अनंत ब्रह्मांडों के स्वामी,
फिर भी मन के अति निकट प्यारे।
अंतर्यामी, परम करुणामय,
हर प्राणी के तुम रखवाले।
जहाँ दृष्टि, वहाँ कृष्ण दिखाई,
जहाँ सृष्टि, वहाँ धाम तुम्हारा।
नाम तुम्हारा सत्य सनातन,
शाश्वत दिव्य प्रणाम हमारा।
अंत नहीं तेरी महिमा का,
शब्द रहें सदैव बेचारे।
काव्य झुके तेरे चरणों में,
स्वर हों केवल गुणगान तुम्हारे।
हे नटनागर, हे गिरिधर,
स्वीकारो यह भाव हमारा।
कण से लेकर ब्रह्मांडों तक,
कृष्णमय है सारा पसारा।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







