खुद की बदमिजाजी से खुद परेशान हम।
अन्दर का इंसान मार कर खुद शैतान हम।।
अब तो शहर की हवा में जहर फैल चुका।
जीने के लिए समझौते इतने नादान हम।।
षड्यंत्र करके चाल चलना दस्तूर बन गया।
सब अखबार बिक चुके इतने बेईमान हम।।
मोहब्बत करने वालों पर कार्रवाई कर रहे।
कानून अपनी जगह मानने वाले हैवान हम।।
बहुत लोग बदल चुके और बहुत बदल रहे।
कीचड़ में रहनुमा उनका करते सम्मान हम।।
सच बयाँ करने वाले जेल भेजे गये 'उपदेश'।
आवाज उठाने पर ना करते अभिमान हम।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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