उम्र पुरानी देह की, दिन-दिन घटता मोल।
तजुर्बा हर रोज़ का, खोल रहा है पोल॥
लकीरें केवल उम्र की, मत समझो इनको।
हर शिकन में वक़्त ने, लिखा है कुछ तुमको॥
कल की गठरी ढोय के, आज न देना हार।
जो बीता सो बीत गया, आज ही असली सार॥
ठोकर खाकर जो उठे, वही समझता राह।
गिरना उसका अंत नहीं, गिरना पहली चाह॥
मिलना-बिछुड़ना जगत में, जैसे नदी की धार।
कौन किसी का हो सका, कौन रहा संसार॥
मीठे बोल न हों अगर, मौन भला है मित्र।
शब्द बहुत कुछ कह गए, मौन लिखेगा चित्र॥
धन-दौलत सब छूटती, छूटे मान-अभिमान।
साथ वही जो बाँट दे, दुख में अपना प्राण॥
मन को जितना जीत ले, उतना जीता लोक।
मन हारा तो राज भी, बन जाता है शोक॥
उम्र घटे तो क्या हुआ, सीख बढ़े दिन-रात।
साँस-साँस में जो जिए, उसकी अमर बात॥
कल की चिंता छोड़ दे, आज सँवार ले मन।
जीवन जल की धार है, ठहरा तो फिर क्षण॥
उम्र हुई तो क्या हुआ, मन में रख विश्वास।
हर दिन जीवन का नया, हर साँस नया प्रकाश॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







