धूप उगी पर छाँव न लौटी (नवगीत)
दिल के इस कोमल कोने में
कब तक दर्द सहूँ,
व्यथा मैं अपनी किसे कहूँ।
धूप उगी पर छाँव न लौटी,
अपनों वाली ठाँव न लौटी,
अपने ही आँगन में कैसे
मैं निर्वासित रहूँ।
रिश्तों के बाज़ार सजे हैं,
अपने-अपने सब रमे हैं,
भीतर से मैं रीता-रीता,
किससे दर्द कहूँ।
व्यथा मैं अपनी किसे कहूँ।
पलकों पर विश्वास है ठहरा,
आँखों में संदेह है गहरा,
साँस-साँस में काँटे चुभते,
कैसे फूल कहूँ।
व्यथा मैं अपनी किसे कहूँ।
थककर भी रुकना कब सीखा,
आँसू पीकर हँसना सीखा,
आए कोई भोर सुनहरी
फिर से राह गहूँ।
व्यथा मैं अपनी किसे कहूँ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







