हंसता तो रोज हूं मगर मुस्कुराता कहां हूं
सबके बीच रहता हूं मगर खुद में रहता कहां हूं
पूछते हैं लोग मुझसे सब ठीक तो है ना
मैं कह देता हूं हां मगर सच बताता कहां हूं
कुछ दर्द ऐसे हैं जिन्हें लफ़्ज़ मिलते ही नहीं
दिल में बहुत कुछ है मगर कह पाता कहां हूं
जिसे अपना समझा था वही दूर हो गया
अब किसी पर पहले सा भरोसा करता कहां हूं
रातें चुपचाप आती है यादें साथ लाती है
सोने की कोशिश करता हूं मगर सो पाता कहां हूं
कभी किसी की कमी भी तो पूरी नहीं होती
मैं खुद से पूछता हूं मगर जवाब पाता कहां हूं
बहुत दिनों से रोया नहीं हूं मैं खुलकर
आज न जाने क्यों ...रोने को जी चाहता हूं
....... सौरव (100₹v)❤️✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







