हनुमान मेरी सुनो,
हनुमान मेरी सुनो,
तेरे राम को मैं कैसे मनाऊं,
ये मेरी बात सुनो,
हनुमान मेरी सुनो,
मेरे तन में, मैं अकेला
क्या करूं मैं, मन है अलबेला,
अब तुम आओ राम को लेके,
मेरे तन में कर दो बसेरा,
तुम से ये तन होगा घर,
तुम दोनों से बने परिवार,
तुम दोनों मिल मेरा तन भरो,
हनुमान मेरी सुनो,
पूर्वधारणा का जग है आदी,
हर जन जन का ये बैर मिटाओ,
मन को कोमल करके जाओ,
मेरा बस ये काम करो,
प्रभु राम से मेरा नाता करो,
हनुमान मेरी सुनो,
प्रभु राम मेरी सुनो,
जग का कल्याण नहीं हो,
तो भी चलेगा,
पर पीर का ये दीमक नष्ट करो,
हनुमान मेरी सुनो,
तेरे राम को मैं कैसे मनाऊं,
ये हाल का तंज हरो,
हनुमान मेरी सुनो,
मेरी व्यथा में कथा है सत्य की,
बस ये सत्य तुम सुनो,
हनुमान मेरी सुनो।
खून ले लो मेरा, नसें नीली कर दो,
राम नाम मेरे तन में उड़ेलो ,
सांस ले लो दम घुटने दो,
पर तुम्हारे अश्रु मुझमें भर दो,
राम के लिए मुझे भी पीर कर दो,
कैसे मनाऊं राम को,
सारे जग को छोड़ मेरी ओर नजर रहे,
हनुमान मेरी सुनो,
प्रभु राम मेरी सुनो,
तेरे राम को कैसे मनाऊं, सुनो,
हनुमान मेरी सुनो।
ये जग है मुझे कुछ भी ना देगा,
हर बार चाहत का ब्याज लेगा,
बिना जाने मेरी हँसी करेगा,
सत्य विश्वास प्रेम शुद्ध रूप में करने ना देगा,
भूखा जग है भूखा रहेगा,
अच्छा मिले फिर निंदा करेगा,
झूठ पे झूठ कहता रहेगा,
ज्ञान का अनादर करता रहेगा,
अपनी वस्तु को कुछ ना समझेगा,
औरों वस्तु का सम्मान करेगा,
धन, प्रसिद्धि प्राप्ति इक दिन खुद को डसेगा,
चरित्र अपना बनावटी रखेगा,
धारणाओं में बस जीवन बस गंवाता रहेगा,
ऐसे कैसे रहूंगा इन साँसों के बीच,
हनुमान मेरी सुनो,
प्रभु राम मेरी सुनो।
राम के नाम को तुम मेरे हृदय में शासित कर दो,
तोड़ दो मुझे, अंदर से कतरा कर दो,
प्रेम ना दो मुझे प्यासा कर दो,
भगा दो मुझे हर जन्म से,
जहां को मुझे लूटा दो,
पर मेरा कर्त्तव्य निश्चित कर दो,
प्राण में हस्ताक्षर राम के कर दो,
कर्म मेरा अडिग अटल कर दो,
हनुमान मेरी सुनो,
तेरे राम को मैं कैसे मनाऊं सुनो,
हनुमान मेरी सुनो।
हनुमान मेरी सुनो।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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