हमें मालूम न था उस एक शीशी शराब में कितना दम था...
गले से उतारते ही वह शख़्स भूल गया
उसके बेटे की मौत का उसे जितना गम था..!
----कमलकांत घिरी

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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हमें मालूम न था उस एक शीशी शराब में कितना दम था...
गले से उतारते ही वह शख़्स भूल गया
उसके बेटे की मौत का उसे जितना गम था..!
----कमलकांत घिरी
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