अपने सारे ख़्वाब भुलाकर अब मैं खुश हूं
दिल में अपने ग़म को छुपाकर अब मैं खुश हूं
कागज़ की मैं नांव यहां लेकर चल निकला
हां अपनी वो नांव डुबाकर अब मैं खुश हूं
सीने पर कितने दिनों से एक भारीपन था
हां उसको अश्कों में बहाकर अब मैं खुश हूं
उल्फत की तकलीफ़, सभी ग़म,वो हर वहशत
ऐ हमदम सीने में दबाकर अब मैं खुश हूं
बेचैनी में कटती हैं मेरी शब ऐ हमदम
यूं तुमपे खुद नींद लुटाकर अब मैं खुश हूं।
-अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







