बस यूं समझो के ज़िंदगी, लटक सी गई है
इधर के ना उधर के बीच में,अटक सी गई है
एक दरिया सा है मावी,जो बहा कर ले गया
सब कुछ जानते हुए भी राहें,भटक सी गई है
ऐसा नहीं है के हमे बिल्कुल तैरना नहीं आता
ना जाने जोर ना लगता बाहें,झटक सी गई है
ज़िन्दगी रूठी रही साथ,तक़दीर का भी न था
मन शांत सा रहता है तबियत,पटक सी गई है
नीटू मावी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







