मरना तो तुम्हें भी है मरना तो मुझे भी है फिर मसला क्या है,
जाना तो तुम्हें भी है जाना तो मुझे भी है फिर मसला क्या है,
शक तो तुम्हें भी है शक तो मुझे भी है फिर मसला क्या है,
शतरंज की बाज़ी जीतकर भी फिर शतरंज खेलना है तो फिर मसला क्या है,
सवालों में सवाल ना मिले जवाब हमने दे दिए फिर हमने सवालों से सवाल ढूँढे हमें ना मिले तुमने जवाब दे दिए फिर मसला क्या है,
खबर नहीं क्या हो रहा है खबर नहीं क्या हो भी गया,
खबर नहीं क्या होगा, खबर नहीं क्या हो सकता है,
फिर मसला क्या है,
क्यूँ दर्द में डूबे डूबे डूबे डूबे,
क्यूँ नहीं निकलते हो,
क्यूँ नहीं हंसते हो,
क्यूँ जिंदा हो इस पतझड़ और सूखे के लिए,
क्यूँ झेल रहे बोझ ये दो चार लोगों का,
बदलते समाज का,
जिसको ये नहीं खबर,
कब जाना हैं घर,
क्या है अपना क्या है अपनी खबर,
किधर है चलते पैरों की डगर,
किधर है गले मिलते शहर,
किधर है मुसाफिरों के सफ़र,
इसलिए काबिल नहीं हो किसी में भी नहीं,
कोई बात नहीं, चुप हो जाओ,
खाली बैठो और खाली कर दो मन की दिशाएं,
खुद को भी एक बार जीने दो,
फिर आना भी नहीं यहाँ,
मगर फिर मसला क्या है,
फिर जो भी हो मसला,
फिर मसला क्या है।!!
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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