""मैं चला जाए हम नहीं जाएगा, क्योंकि माया हम ही तो है।
मौन तो आवाज ही है,
क्योंकि कोई कहता है कोई सुनता है,
मौन ही तो एक खुद से ख़फ़ा है
तभी आवाज़ कर बैठा,
पहले मौन ही था ,
तो बहुत उदास था संसार में कोई नहीं ऐसा मौन होने का क्या मतलब,
फिर मौन अपनी जगह से निकला उल्टा होकर मोक्ष तक फिर मोक्ष से महादेव तक फिर मृत्यु से आवाज आई जीवन फिर जीवन से सब तरफ आवाज ,
आवाज से इंसान,
वो फिर मौन हो गया,
मैं तो यही कहता हूं कि ईश्वर मंजिल से उतर रहा है, और तुम लोग चढ़ रहे हो ताकि वहां भी सहारा मिले।
माध्यम थोड़ी हूं बल्कि सही जी रहा हूं।
पा लेना ही तो त्याग है।।""
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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