तुम्हारी स्मृतियों ने एकान्त से बाँध कर रखा।
साँसों ने भी कहा-अनकहा स्वर तान कर रखा।।
भूलूं कैसे उस छवि को प्राण वायु सी रिसती।
अमिट निरंतर साँसों ने अन्दर तांडव कर रखा।।
अलौकिक अभिलाषाओं को शांत करूँ कैसे।
प्रेम की भाषा ने उलझन में मन डाल कर रखा।।
थककर देह कभी मिट्टी की गोद में सो जाएगी।
दीपक की मद्धम लौ ने मुझको बाँध कर रखा।।
मेरे अंतिम स्वप्नलोक में तुम कब तक आओगे।
व्याकुल मन ने 'उपदेश' आसक्ति बना कर रखा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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