गुजरता नहीं है जब तक वो समझ नहीं सकता,
कोई भी हादसा पहले क्यों नहीं कर सकता,
हर वजूद उसकी आँख में नजर आया है,
उसकी आँखों में आया हर एक आँसू उसकी वज़ह समझ नहीं सकता,
ये जो संभलने की तैयारी है,
ये पहले क्यूँ नहीं कर सकता,
ज़ख्म जिक्र किसी को भी करना नहीं आता है,
ये बार बार मजाकिया दवा देकर कोई किसी का ज़ख्म नहीं भर सकता।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







