हवाएँ मौसम के साथ तासीर बदल लेती।
उसी तरह एक तुम हो माहौल बदल देती।।
बिना अनुमति के ठहर जाओ जिन्दगी में।
तुम्हारी याद से संवेदनाएँ रूप बदल देती।।
आजाद होकर विचर रही हवाएँ साँसों में।
तुम्हारी महक फैलाते हुए दिन बदल देती।।
कब तक तड़पाओगी प्यास बुझाने आओ।
अदृष्य पीड़ा को नींद के ख्वाब बदल देती।।
हृदय में चुभती तेरी ग़ैर मौजूदगी 'उपदेश'।
मौजूदगी होती तो मेरी दुनिया बदल देती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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