ये कैसी अनसुलझी पहेली है
एक चिता तब जली थी, और
एक चिता हर रोज जलती है
ना उजाला है, ना अंधेरा फिर भी
एक चिता हर रोज जलती है
हर चिता कि भी अपनी किस्मत है
कोइ लाश बनकर जलती है तो
कोइ जिंदा रहेकर जलती है
ये कैसी अनसुलझी पहेली है
एक चिता हर रोज जलती है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







