एक ही तो दिल था
हमने तुमको दे दिया
बिना दिल के ज़ीने का
सलीका सिखाओ जरा
आती नहीं है हमको
क्या है वफ़ा का चलन
अगर तुमको आती है
हमें भी बताओ जरा
सुबह की पलाशी रंग
सांझ की बादामी रंग
क्यूं लगे बेगानी सी
आओ समझाओ जरा
आती नहीं हलक से
प्यार के वो तीन शब्द
आंखों से ही बोल दें
आओ न जताओ जरा
मेरे मन के गुलाब को
छुओ अपनी सांसों से
प्रणय दिवस मेरे संग
ऐसे ही मनाओ जरा ।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







