एक गुलाब इन्हें भी देना
अपनी संस्कृति को भूल,
आधुनिकता में यूँ उलझे हैं लोग,
कि अपनों को ही भूल गए हैं।
स्कूल ,कॉलेज,हर गली-शहर में
गुलाब दिवस की धूम मची है,
गुलाब की बिक्री खूब बढ़ी है,
दोस्ती को समझे बिना ही
गुलाब देने की होड़ सब को लगी है।
क्या अपनी माँ में कभी दोस्त नज़र नहीं आया तुमको ?
अगर आया है कभी,
तो आज एक फूल अपनी माँ को भी देना।
क्या भाई-बहन के रिश्ते से भी गहरी दोस्ती कहीं देखी है?
यह रिश्ता तो दोस्ती की सच्ची मिसाल है,
तो आज एक फूल उन्हें भी देना।
क्या हमेशा पापा की डाँट ही नज़र आई तुमको?
कभी हक़ जताने वाला दोस्त भी दिखा हो उनमें ,
तो एक फूल आज पापा के लिए भी बनता है।
क्या हर सुख-दुख में साथ खड़ा रहने वाला
हमसफ़र एक सच्चा दोस्त नहीं होता?
अगर इस दोस्ती को तुमने निभाया है,
तो आज एक फूल अपने हमसफ़र को ज़रूर देना।
क्या ग़मों में भी चेहरे पर मुस्कान लाने वाले
हमारे बच्चे दोस्त नहीं होते ?
अगर बच्चों की अनमोल दोस्ती तुम्हें प्यारी है,
तो तुम्हारे गुलाब पर उनका भी हक है।
हर रिश्ते में एक सच्ची दोस्ती छिपी होती है,
जो दिखावे से दूर हमें अपनों के करीब ले जाती है।
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







