जीते जी जिक्र फरिश्ता न कहा गया तुम्हें।
दीवार की तस्वीर बनकर न रहा गया तुम्हें।।
बिना बुलाये आते हो ख्वाबों में किसलिए।
गुनाह के बीच में बेगुनाह न रहा गया तुम्हें।।
तुम से चाहिए क्या ज़रूरत पर बेगाने रहे।
बेवक्त पर भिड़े मेहरबान न रहा गया तुम्हें।।
प्रेम के नाम पर भी छल करते रहे 'उपदेश'।
कमी छुपाते रहे खुलकर न रहा गया तुम्हें।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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