दर्द का दिल से रिश्ता है पुराना।
दुख–सुख का जीवन में लगा रहता है आना–जाना।
दुख–सुख तो है मानव के जीवन का आधार।
दुख–सुख का मिलना कर्मा है हमार।
दुख न हो जीवन में तो, जीने का मज़ा क्या है,
सोडा बिन जाम पीने का मज़ा क्या है।
दुख–सुख जीवन में कहाँ रहते हैं सदाबहार,
दुख–सुख ही तो है मानव के जीवन का आधार।
दुख सहकर ही सुख की होती है पहचान,
वरना खुशियों से रह जाते हैं हम अनजान।
जीवन में दुख न हो तो, क्या है जीने का मज़ा।
किसको कितना दुख–सुख मिलना है जीवन में — ये है ईश्वर की रज़ा।
दर्द का दिल से रिश्ता है पुराना,
जीवन में दुख–दर्द का लगा रहता है आना–जाना।
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


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