आईना बाते करने को मजबूर हो गया।
तन्हाइयाँ जायेगी आना मंजूर हो गया।।
किताब में दबाकर रख दिये खत उसके।
ख्यालों में खोए रहने का दस्तूर हो गया।।
उसे गले लगाए हुए कितने दिन बीत गए।
इसका हिसाब-किताब रखना दूर हो गया।।
शाम की विषमताएं परेशानी में डाल रही।
हर रात में नींद का आना दूभर हो गया।।
मौका ताड़ लेती बहिन बैठने का 'उपदेश'।
रोज रोज मुझे चिढ़ाने का दस्तूर हो गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







