ठोकरे बहुत हैं राहों में,
चलना मेरी फ़ितरत है,
जो हंस रहे हैं मुझ पर आज,
हंसना उनकी फितरत है ... हंसना उनकी फितरत है,
उनको अगर पता होता क्या है मंजिल मेरी .............तो खुद ही चुप हो जाते हैं,
अपनी कामयाबी से बताना है मुझको..
कि अब ना .. रुकना मेरी फितरत है...
कि अब ना .. रुकना मेरी फितरत है...
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







