मेरे घर की
बालकनी में
ग्रिल लगने से
और कुछ नहीं
बस ये हुआ
कि अब चांँदनी
छन-छन कर आती है
और चांँद
टूकड़ों में
नज़र आता है
जो बातें जी भर कर
हुआ करती थी
कहकशां से
अब उन्हीं बातों के
बोझ तले दिल
दब कर रह जाता है

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
मेरे घर की
बालकनी में
ग्रिल लगने से
और कुछ नहीं
बस ये हुआ
कि अब चांँदनी
छन-छन कर आती है
और चांँद
टूकड़ों में
नज़र आता है
जो बातें जी भर कर
हुआ करती थी
कहकशां से
अब उन्हीं बातों के
बोझ तले दिल
दब कर रह जाता है
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