चाहत (नज़्म)
कोई चाहत तो होती अपने दिल में
कि ये चाहत भी अब दिल में नहीं है
कोई हसरत तो होती दिल में अपने
कि ये हसरत भी अब दिल में नहीं है
बस एक वीरानी सी वीरानी है अब
कोई अब रात न सुहानी है अब
न सुबह की कोई चाहत है दिल में
न अब कोई भी हसरत है दिल में
न चाहत है तुझे अब देखने की
और न मिलना तुझसे चाहता हूं
बस एक सवाल ख़ुद से कर रहा हूं
कि क्या मैं अब भी तुझको चाहता हूं
न जाने दिल में क्या-क्या चल रहा है
बेवजह दिल भी क्यों मचल रहा है।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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