एक बात समझ में आ जाए तो,
दूसरी बात समझ में आ जाती है,
पर वो एक ही बात में अलग-अलग लोगों की हिस्सेदारी हो तो,
वही बात या तो उसी रूप में आती है,
या वही बात के हिस्से अवरोध कर जाती है।।
आईना नहीं दिखाना,
वो इंसान दिखाना है,
जो तड़प रहा है
अपने वजूद के लिए कि वो एक इंसान हैं।।
आप कुछ ना बोले,
आपका काम हो जाए,
भले दूसरा आपके काम के लिए तड़पता रह जाए।।
आप अपनी तरक्की चाहते हैं,
आप अनुभवी हैं,
जानते हैं खुद के काम को, पकड़ है,
जानते उन लोगों को जो आपसे अपना काम करवाते हैं,
पर आप नए आए व्यक्ति को जो इस काम में नया है,
उसे कुछ नहीं बताते है, मुंह फेरे हुए बात करते हैं,
नज़र दे नजरंदाज करते हैं,
कुछ गलती और उसको सुनाते जाते हैं,
पर उसे तसल्ली से काम की हकीकत तहजीब नहीं बताते हैं,
उससे सिर्फ अपना अधूरापन रखते हैं।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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