मेरी बाते उसे पसन्द सुनता दिल से।
वह शांत एक समुन्दर सा अन्दर से।।
अल्हड सी चलती रहती खुश होकर।
वह ताकता रहता कहने को अन्दर से।।
उसे आती नही चालाकियां मैं तेज हूँ।
बिखरी रेत सी वो समझदार अन्दर से।।
मैं हँसती बेपरवाह सी उसे हँसाने को।
वो शायद मुस्कान संभालता अन्दर से।।
मैं ज्यादातर लफ्जों में खोती 'उपदेश'।
जब कि उसका प्रेम झाँकता अन्दर से।।
है दोनों अलग किनारे फिर भी दिल में।
गुंजाईश दोनों में तड़पती रहती अन्दर से।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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