मुझे मेरा भविष्य नजर आ रहा था,
मैं जाना चाहती थी उसमें,
कुछ नजर नहीं आ रहा था,
बस जरूरत थी हां की,
क्या होगा आगे नजर नहीं आ रहा था,
मुझे चाहिए क्या कोई पूछने नहीं आ रहा था,
मेरे सपने चूर-चूर हो रहे थे,
दिल को आराम नहीं आ रहा था,
सपना मुझसे कुछ दूर ही खड़ा था,
मैं पकड़ना चाहती थी उसे,
और वो मुझे दूर भागना चाहता था,
क्या मालूम उसे मैंने कितने आंसू बहायें..?
धीरे-धीरे वो मुझसे दूर विलुप्त होता जा रहा था,
क्या करूं मुझे मेरा भविष्य मार रहा था...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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