जिस मोड़ पर जिंदगी आकर रूकती है,
उस मोड़ पर तू भी आकर रुक जाना,
तुझको भी समझ आएगा मेहमान दीवाना,
अपने लिए तो जीना कितना मुश्किल है,
अपने ज़ख्म की बातें समय से भुला दिया,
पर समय को इतना ज़ख्म क्यों अदा किया,
उस समय का भी सोचों क्यों बोझ में उसको दबा दिया,
वो जल्दी ही गुज़र गया साथ नहीं ले गया तुम्हें,
आखिरी दीवाने तुम ही थे,
तुम्हें भी हटा दिया,
यारी ना याराना कोई है,
सब एक दिलासा है,
सब एक कुसूर में आ गए,
सबको क्यों सजा दिया,
मालिक तुम गायब हो,
मेहमान हमें बना दिया,
पर फ़ना का सिलसिला,
क्यों जीना तबाह किया।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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