बैंक वाले भी कमाल करते हैं,
थोड़ा रुको-थोड़ा रुको बोलके,
बाद में भगा देते हैं।
अजीब मारा मारी है बैंक वालों का,
खुद खा-पीकर कस्टमर को परेशान करते हैं।।
- सुप्रिया साहू

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
बैंक वाले भी कमाल करते हैं,
थोड़ा रुको-थोड़ा रुको बोलके,
बाद में भगा देते हैं।
अजीब मारा मारी है बैंक वालों का,
खुद खा-पीकर कस्टमर को परेशान करते हैं।।
- सुप्रिया साहू
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम