Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

वो बेटे हैं हिंदुस्तान के - कमलकांत घिरी

🇮🇳"वो बेटे हैं हिंदुस्तान के"🇮🇳

दिल, दवा, दर्द, गुलाब की बातें छोड़ो,
ये मौसम नहीं है प्यार के,
हुस्न से ठगे जा रहे नौजवान,
उधर सरहदों पर नौबत आ गई है वार के,
घड़ी भर वक्त नहीं अब प्रेम का, उठा लो तलवार नाज़ुक फूलों को रख दो अब म्यान पे,
मिट्टी न सूखने देंगे सीमाओं पर हिंदुस्तान के,
सींचकर लहू से अपने करेंगे रक्षा भारत की स्वाभिमान के,
हो अगर तुम शूरवीर, हो अगर तुम नौजवान,
युद्ध के पोशाक को कर लेना तुम भी अंगीकार,
मां भारती की चीख है जो सरहदों पे गूंजता,
पहलगाम के हमले को क्या तू एक पल में है भूल गया,
छल्ली करके सीने को सुहागों को है मिटा दिया,
धर्म जानकर जो मारता देखेगी दुनिया हश्र उनका होगा क्या,
प्रतिकार की ज्वाला धधक रही हर सीने पे,
बूंद बूंद को तरसेंगे वो पानी न मिलेगी पीने के
क्या कम आंका था दुश्मन ने हमें, क्या नादां ही समझ वो हमें रहा,
क्या भूल गया सन् 71 का युद्ध या याद दिलाएं घुसपैठी हार,
उम्मीद रखी हमने जब भी सुधरेगा वो अब इस बार,
मगर हरकतों से अपनी वो दिल दुखाता आया हर बार,
कब तक चुप बैठे रहते हम भी, कब तक औलाद की गलती करते माफ़,
अब सिंदूर का बदला लेने भारत के वीर मैदान में खड़े हैं आज,
आज उन्होंने दिखा दिया, सिंदूर को बारूद बना दिया,
ये दिखा दिया कि भारत कोई बच्चा है नहीं जिसके साथ अठखेलियां खेला जाएगा, जो भी दिखायेगा ऊंगली उसे उसके घर में घुसकर मारा जाएगा,
यहां की मिट्टी में लहू समाया है,
यहां हर जवान के सीने में कुर्बानी का जूनून छाया है,
ये भारत है यहां राणा के वंशज फलते फूलते हैं,
यहां हर जवान के सीने में देशप्रेम के दीपक जलते हैं,
वो कर्मवीर, वो शूरवीर, वो मूरत हैं बलिदान के,
जो दुश्मन के शीश ले आते हैं वो बेटे हैं हिंदुस्तान के,
जो दुश्मन के शीश ले आते हैं वो बेटे हैं हिंदुस्तान के।।

#कमलकांत घिरी ✍️
मनकी, लोरमी, मुंगेली, छत्तीसगढ़।




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

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रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

waah bahut sundar

कमलकांत घिरी replied

बहुत शुक्रिया दीदी जी😊🙏

वन्दना सूद said

वाह वाह कमल जी क्या कमाल लिखा 🇮🇳🇮🇳👌👌👏👏दिल्लगी के अलावा भी बहुत कुछ है दुनिया में समझने को

कमलकांत घिरी replied

बहुत बहुत शुक्रिया मैम, आपको हमारी लेखनी पसंद आयी उसके लिए दिल से धन्यवाद 🙏😊 प्रणाम 🙏

ममता तिवारी said

बहुत सुंदर रचना काबिले तारीफ अति उत्तम लाजवाब काफी सुंदर कमल कांत जी 🙏🙏👌👌

कमलकांत घिरी replied

बहुत बहुत धन्यवाद मैम 🙏

सुप्रिया साहू said

वाह वाह....देश भक्ति से ओत प्रोत रचना, बहुत खूबसूरत रचना 👌👌, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳🇮🇳, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

कमलकांत घिरी replied

Bahut shukriya Supriya jii🙏😊

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

देश के रक्षक शूरवीरों के लिए अद्भुत उद्गार । क्या बात है 👌👌🙏🙏🙏

कमलकांत घिरी replied

बहुत शुक्रिया सर जी आपको सादर प्रणाम 🙏

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