गलतफहमी के धुँआ से जब बाहर आए।
भाव विभोर होकर हम दोनों विचर पाए।।
दूरियाँ घटने लगी कुछ इस तरह दोनों की।
नासमझी के स्वार्थी धागे भी कमजोर पाए।।
हम जो कहते रहे वो शब्द कुछ और समझे।
पर्त-दर-पर्त खुलने पर उजाले की सहर पाए।।
रोशनी में जगमगाते चेहरे शामिल 'उपदेश'।
आँखों में आँखें डाले भविष्य के पहर पाए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







