कितनी बंदिशों में ज़िन्दगी बाँध कर बैठे।
खुशी के रास्ते खुद-ब-खुद रोक कर ऐंठे।।
दिल तो अच्छा पर पहचान में कच्चा मेरा।
खुलकर जीना न सीखा बीमारी पाले बैठे।।
तलाश खत्म करने का वक्त आया गया भी।
अपने अन्दर जाने क्यों ऐसा मानकर बैठे।।
पल-पल उम्र का सरकना बेचैन कर रहा।
नजर का फ़ेर पास की चीज़ दूर मान बैठे।।
गणित आती जरूर इस्तेमाल नही आता।
दिल जिसको चाहता 'उपदेश' दूर किए बैठे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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