बड़ी तकलीफ में हूँ साहब क़ोई तों दवा दीजिए
अगर नहीं तों फिर मौत दीजिये या सज़ा दीजिए
कब की आँखे सूखने लगी अश्क़ थक के रेत हुए
ऐसी बेरहम जिंदगी में ख़ुदा थोड़ी कज़ा दीजिए
दोस्त भी एरा-गैरा मिला ज़रा भी गैरत नहीं उसमे
ऐ दोस्त मेरे दुश्मनी में आप ज़रा तों वफ़ा दीजिए
बेदर्दी इश्क़ ने मारा हैं हमकों यूँ वक़्त ने दुत्कारा हैं
जीने की उम्मीद मर चुकी मौत की बद्दुआ दीजिए
ग़र्दिश-ए-अय्याम सें निकलना मुमकिन नही जानाँ
पा-मर्दी दम तोड़ रही आप भी हमकों विदा दीजिए
कृष्णा ने ख़्वाब देखा मुक़म्मल जिंदगी में इश्क़ का
बड़ा संगीन ज़ुर्म हुआ हैं इस ज़ुर्म की सज़ा दीजिए
-कृष्णा शर्मा
ग़र्दिश-ए-अय्याम = मुसीबत के दिन
पा-मर्दी = पैरो पर जमे रहना या मजबूती से खड़े रहना


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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