बचपन के वे अनमोल पल
समय की रफ़्तार कभी थमती नहीं,
वह अपनी ही धुन में चलती रहती है।
कुछ पल हमें ही समय से माँगने पड़ते हैं,
अपनी झोली से कुछ यादें निकालने के लिए।
चढ़ते सूरज से आँखें मिलाना,
क़तारों में उड़ते पक्षियों को गिनना,
पिट्ठूग्राम ,गिल्ली-डंडा खेलना,
शनिवार को तेल में झाँककर
उसमें चुपके से सिक्का डालना,
और रात में तारों के बीच सप्तऋषि ढूँढना।
हम हर अच्छे बुरे पल याद रखते हैं,
पर बचपन के वे अनमोल पल जीना भूल जाते हैं ।
बचपन एक ऐसी उम्र है,
जो हर उम्र में उत्साह भर देती है।
अगर बचपन को जीवन में जिंदा रख लें,
तो मन के कितने ही गिले-शिकवे
बचपने की तरह ही भूल जाएँ॥
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







