तुम कब समझोगे,अरे! बात इतनी सी,
मेरे व्याकुल मन की, जज्बात इतनी सी!
अरे!काहे डरते हो, आखिर जमाने से,
कर नहीं सकते, मुलाकात इतनी सी!
देख चंदा को, तुम याद आते हो,
हमको लगती है, हर रात इतनी सी!
दो पल में ही घूमेंगे, सदियों की गलियां,
हमको तो बस चाहिए, तेरा साथ इतनी सी!
प्रेम- पीर की माया को जानोगे तुम भी,
राधा का राधे बनो, बस, बात इतनी सी!!
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







