इतनी कटुता हमसे काहे,
अरी ! अमुवा की डाली!!
हरी हरी साड़ी पहनके क्या हम
तुम्हरी तरह इतराएं
ओढ़ चुनरिया रंग सुनहरी
पुरवा संग लहराएं
सूरज की किरणों से खुद को
अग्नि रंग नहलाएं
हम तो ठहरे बिरहन, तुम संग
कैसे बसंत मनाएं
देखो जरा हालत हमरी
क्या से क्या है बना ली
इतनी कटुता हमसे काहे
अरी! अमुवा की डाली!!
पगडंडी पर देखें तुमको
दुल्हन सी शरमाये
हमको आए याद पिया की
मन भरके अकुलाये
तुम्हरे बांह में कोयल बैठे
प्रीति तान सुनाए
हमरी बांह में पिया नहीं है
हम किसको सहलाएं
तुमको देखके जलें हैं मन मन
फिर भी हो नखराली
इतनी कटुता हमसे काहे
अरी! अमुवा की डाली!!
मधुर बयारें जब जब तुमको
अपनी छुअन से छेड़े
सुगन्ध बिखेरे बौर तुम्हारे
इठलाए और खेले
मीठा रस जब बरसे तन में
लगे कि जियरा ले ले
तुम क्या जानो पीर हमारी
पिया बिन बसंत के मेले
तुम्हें घमंड है अपने रंग का
जो नखशीश लगा ली
इतनी कटुता हमसे काहे
अरी! अमुवा की डाली!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







