Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

अपना नाम लूं - सुप्रिया साहू

जिंदगी की इस भीड़ में मैं किस का नाम लूं,
कोई पूछे उदासी का मंजर तो अपना नाम लूं,

किस को फर्क पड़ता है मेरे होने ना होने से,
गर हो जाए कोई ग्रहण भी तो अपना नाम लूं,

फलक पर ला बिठाने वाले इस दुनिया के तुम,
गिर जाए कोई वहां जाकर तो अपना नाम लूं,

शामिल नहीं हूँ मैं किसी की भी खुशी में,
दुःख हो जाए किसी को तो अपना नाम लूं

क्या जाने सुप्रिया कैसा होता है ये प्यार व्यार,
कोई मिट जाए गर प्यार में तो अपना नाम लूं...।।

- सुप्रिया साहू




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (6)

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Lekhram Yadav said

बड़ी खुद गर्ज होती जा रही हो, क्या आपका नाम लेने वाला कोई नहीं है? खुद को समझाती एक खूबसूरत रचना, आपको सादर नमस्कार।

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

दुनिया के सारे इल्जाम खुद पर ले लेने की एक खूबसूरत ख्वाहिश।इस रचना में एक ऐसी पीड़ा है जो प्यार में ठोकर खाये प्रेमिका के हृदय में घर कर गई है। टूटे हुए पर जीने की हिम्मत को संजोए सुंदर रचना 👌🌹🙏

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

उपदेश कुमार शाक्यावार said

लाजवाब ख्वाहिश की झलक. नमस्कार जी

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

आलोक कुमार गुप्ता said

आपकी ग़ज़ल में अकेलेपन, आत्मपीड़ा और उपेक्षा की अनुभूतियाँ अत्यंत मार्मिकता के साथ अभिव्यक्त हुई हैं। हर शेर मन की गहराइयों को स्पर्श करता है और मक़्ता भावों को संवेदनशील समापन प्रदान करता है।

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

आदर्श भूषण said

आपने जीवन की उपेक्षा, आत्मपीड़ा और प्रेम की विडंबना को अत्यंत मार्मिक, संवेदनशील तथा प्रभावशाली शब्दों में हृदयस्पर्शी ढंग से अभिव्यक्त किया है।

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

वाह वाह वाह

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद मैम 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

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