मौन जैसे कितना कुछ कहना चाहता।
सघन सन्नाटा माँ को एकटक निहारता।।
पिता की चिट्ठी से जुड़ा अनुभव पुराना।
मद्धिम जलता हुआ दीप भी याद आता।।
माँ के टूटे-फूटे उच्चारण को याद करके।
प्रेम का प्रवाह अतीत के पन्नों से जोड़ता।।
पत्रों के कथानक केवल पुरुष ऐसा नही।
इससे संवेदना की सीमा का पता चलता।।
वह वक्त कैसा था जो आजकल खो गया।
गति पूर्व में रही या अब मुझको नही पता।।
रूप बदला 'उपदेश' ज़ज्बात वही सब में।
मानवीय और संवेदनशील बनाए रखता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







