इश्क़ कुछ किराए का था,
घर के भीतर आता,
सहज नहीं रह पाता,
दुनिया से उसे सीखना पड़ता,
कहाँ वो बेहतर है,
इश्क़ अपने साथ खुद आया था,
पर उसे अकेला समझा गया,
शायद वो अकेला ही था,
इसलिए सबका साथ देने लगा,
और हम लोगों ने दो के बीच में उसे रख दिया,
तो वो वहां भी अकेला ही रहा,
किसी ने अपनाया नहीं उसे,
आप भी ऐसे ही हैं,
कहीं ना कहीं दो के बीच में है,
इसलिए अकेले हैं।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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